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Delhi दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के बढ़ते खतरे पर राज्यों की खिंचाई की है। कोर्ट ने कहा कि विभिन्न राज्य स्टेरलाइजेशन, डॉग पाउंड बनाने और स्कूल, अस्पताल और कॉलेज जैसे संस्थानों के परिसर से कुत्तों को हटाने के लिए जरूरी कदम नहीं उठा रहे हैं। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने असम के आंकड़ों पर हैरानी जताई। राज्य में 2024 में 1.66 लाख कुत्तों के काटने के मामले दर्ज हुए, लेकिन वहां सिर्फ एक डॉग सेंटर काम कर रहा है। कोर्ट ने इसे चौंकाने वाला बताया कि 2025 के सिर्फ जनवरी महीने में ही 20,900 लोगों को कुत्तों ने काटा। बेंच ने नाराजगी जताते हुए कहा कि यह स्थिति बेहद गंभीर है और राज्यों को तुरंत प्रभावी कदम उठाने चाहिए।
अमाइकस क्यूरी (कोर्ट के सहायक) वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव अग्रवाल ने कोर्ट को बताया कि आंध्र प्रदेश में 39 एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) सेंटर हैं, जहां रोजाना 1,619 कुत्तों की नसबंदी हो सकती है। उन्होंने सुझाव दिया कि राज्य को मौजूदा सुविधाओं का ऑडिट कराना चाहिए ताकि पता चले कि उनका पूरा इस्तेमाल हो रहा है या नहीं। साथ ही नए एबीसी सेंटर बनाने के लिए स्पष्ट समयसीमा तय की जाए। आवारा कुत्तों की पहचान और गिनती के लिए स्थानीय लोगों और संबंधित संस्थाओं की मदद ली जाए।
असम के बारे में गौरव अग्रवाल ने कहा कि राज्य में सिर्फ तीन म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन हैं, लेकिन एबीसी सेंटर बहुत कम हैं। यहां से ही शुरुआत करनी होगी। असम को एबीसी सेंटर बढ़ाने के लिए विस्तृत एक्शन प्लान तैयार करना चाहिए और प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है। गोवा और केरल के समुद्र तटों पर कुत्तों की मौजूदगी का मुद्दा भी उठा। उन्होंने बताया कि इन तटों पर कुत्तों को वापस नहीं छोड़ा जा सकता। कोर्ट ने सहमति जताई कि इससे पर्यटन पर बुरा असर पड़ सकता है। कोर्ट ने एससीएओआरए (सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स ऑन रिकॉर्ड एसोसिएशन) के सम्मेलन के दौरान गोवा में अपने अनुभव का जिक्र किया, जहां कुत्तों की मौजूदगी से परेशानी हुई।
उन्होंने बुधवार को सभी राज्यों द्वारा दाखिल स्टेटस रिपोर्ट कोर्ट के सामने रखीं और इन्फ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया। कोर्ट ने राज्यों से कहा कि वे स्टेरलाइजेशन, वैक्सीनेशन और डॉग शेल्टर जैसी सुविधाओं को मजबूत करें। मामले की अगली सुनवाई 5 फरवरी को होगी। यह मामला देशभर में आवारा कुत्तों के काटने की घटनाओं में बढ़ोतरी के बीच महत्वपूर्ण है, जहां लोगों की सुरक्षा और पशु कल्याण दोनों को संतुलित करने की चुनौती है।
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